ज़िला उन्नाव/फीस को लेकर विद्यालय प्रबंधक संचालक के द्वारा बच्चों को प्रताड़ित किए जाने से हजारों विद्यार्थी बच्चे शिक्षा से हो रहे वंचित।

उन्नाव उत्तर प्रदेश, जहां पर एक तरफ कोरोना वायरस महामारी से लड़ते-लड़ते हमारा संपूर्ण भारतवर्ष के गरीबों की और किसानों की कमर टूट गई है शहरों की आधी फैक्ट्रियां बंद पड़ी हुई हैं और जिस फैक्ट्रियों में कारखानों में अगर 500 लेबर काम करता है इस कोरोना काल में मात्र फैक्ट्रियों में 200, या डेढ़ सौ लेबरों से काम चलाया जा रहा है जिन लेवरो से काम कराया जा रहा है उनका पूरी तरह से पेमेंट भी नहीं दी जा रही है महंगाई लगातार कमर कसे हुए है इस महामारी में विद्यालय पूर्ण रूप से बंद कर दिए गए थे बड़े-बड़े नामचीन विद्यालयों में ऑनलाइन से पढ़ाई कराई जा रही थी लेकिन शासन प्रशासन को यह नहीं पता कितने घरों की लड़कियां लड़के पढ़ाई के नाम पर गंदे गंदे वीडियो और फोटो देख रहे हैं जिससे वह बर्बाद होते जा रहे है और छोटी क्लास वाले बच्चों के स्कूल पूरी तरह से बंद रखे गए थे अब लगभग छोटे बच्चों के विद्यालय पूर्ण रूप से चालू कर दिए गए हैं विद्यालय प्रबंधक लगातार बच्चों को और अभिभावकों को फीस को लेकर लगातार परेशान कर रहे है ऐसे में प्रश्न यह उठता है❓अमीर और सरकारी नौकरी वाला व्यक्ति अपने बच्चों की फीस तो भर देगा लेकिन उन गरीब लाखों व्यक्तियों का क्या होगा जिनके घरों में एक वक्त का खाना बन रहा है नौकरी खत्म हो गई हैं कारोबार बंद हो गए हैं महंगाई कमर कसे हुई है उनके दिल से पूछो जो एक वक्त का खाना खा रहे हैं कैसे अपने बच्चों की फीस भरेंगे लेकिन विद्यालय संचालक प्रबंधक बच्चों व अभिभावकों को लगातार प्रताड़ित करते आ रहे हैं अगर आप वर्ष भर की फीस नहीं भरी तो आपको फेल कर दिया जाएगा और आप का बच्चा 1 साल पीछे हो जाएगा यहां तक कि देखा गया है उन्नाव शहर में कई विद्यालय फीस की माफी भी की है पूर्ण वर्ष की फीस ना लेकर आधे वर्ष की फीस जमा कर रहे हैं और वहीं पर उन्नाव शहर में कई नामचीन विद्यालय अधिकारियों से सांठगांठ करके सिर्फ 20,25 प्रतिशत की माफी करके पूर्ण वर्ष की फीस जमा करने के लिए बच्चों को प्रताड़ित कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार और उन्नाव के शासन प्रशासन को इस विषय में गंभीरता से विचार विमर्श करना चाहिए ताकि गरीब बच्चों के जिंदगी का सवाल है अगर इस तरह विद्यालय संचालक फीस लिए प्रताड़ित करते रहेंगे तो मीडियम क्लास एवं गरीब व्यक्ति अपने बच्चों को विद्यालय भेजने में असमर्थ हो रहे है तो ऐसे में उन्नाव जनपद से लेकर हमारे शहर में अनपढ़ों की संख्या बढ़ जाएगी। सरकार और जनपद के शासन प्रशासन को अवगत कराना चाहूंगा ऐसे विद्यालय संचालकों व प्रबंधक के ऊपर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और बच्चों की फीस माफ की जाए।

इरफान खान बांगरमऊ उन्नाव।

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