लेकर लोग जागरूक हो रहे हैं, जिससे देश की पहचान विश्व गुरु के रूप में बन रही है. वहीं यूपी के बस्ती जिले में भारतीय आयुर्वेद पद्धति दम तोड़ रही है. जनपद के कोर्ट एरिया में बने आयुर्वेदिक अस्पताल की रंगाई-पुताई तक नहीं हो पा रही है. मरीजों को भर्ती करने के लिए अस्पताल में रखे बेड तक टूट गए हैं. वहीं पूरे जिले में 35 आयुर्वेदिक चिकित्सालय और 3 यूनानी चिकित्सालय हैं. साथ ही इन 38 चिकित्सालयों में कुल 9 चिकित्साधिकारी नियुक्त हैं. बाकी जगह फार्मासिस्टों के भरोसे लोगों का इलाज हो रहा है, पर जिम्मेदारों की नजर इस पर नहीं पड़ रही है. 1991 में जिले को 15 बेड के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की सौगात मिली थी. शुरुआती दिनों में तो सब ठीक ठाक था लेकिन सरकार की उदासीनता से प्रचार के अभाव में धीरे-धीरे यहां मरीज आने कम होने लगे. आज स्थिति यह है कि अब मात्र कुछ गिने चुने लोग की यहां आते हैं. यहां 15 बेड में सिर्फ पांच ही बेड बचे हैं, और वो भी खाली पड़े हैं।
हैरान करने वाली बात यह भी है कि 27 साल से यह अस्पताल किराए के जर्जर भवन में चल रही है. अस्पताल में पीने के पानी तक कि व्यवस्था नही है मजबूरन लोग हैंडपंप का दूषित पानी पी रहे हैं.वहीं क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सा अधिकारी ए. के. श्रीवास्तव ने बताया कि डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए जल्द ही भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दवाओं की उपलब्धता में भी सुधार हुआ है, सभी आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सालयों पर पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. चिकित्साधिकारी ने कहा कि आयुर्वेद पद्धति फिर से लोकप्रिय हो रही है, सरकार भी इस पर ध्यान देने लगी है. जर्जर भवन को लेकर जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि अस्पताल को अपने भवन में शिफ्ट करने की प्रक्रिया चलरही है, जिसमें भवन निर्माण व महत्वपूर्ण उपकरण शामिल हैं. उन्होनें बताया कि रुधौली मार्ग पर भी एक 50 बेड के अस्पताल का निर्माण चल रहा है।

रजनीश कुमार पाण्डेय
आज का अपराध, ब्यूरो चीफ
बस्ती यूपी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here