नववर्ष की बेला आयी
नवमंगल का गान है
सूर्य ने अपनी लालिमा फेरी
अम्बर ने रचा नया परिधान है

भव्य दिख रहा सारा मंडल
धरा पे आया नव विहान है
गम के बादल सारे छट गये
खुशियों की बारिश से भीगा सारा जहान है

व्यवस्थाओं में जो हो उलझा जीवन
नववर्ष में होगा इसका निदान है
झूठे बाह्य आडंबरों को छोड़ो
होगा फिर सबका कल्याण है

स्वरचित क्रोध की मालाओं को
तोड़ के देखो क्या होता परिणाम है
मैं का अहम टूट जाएगा
सभ्यताओं में होगा नव विधान है

अंहकार को पी जायेंगे
अपना ये आयोजन है
गुमनामी का बोझ हटेगा
नववर्ष का यह प्रायोजन है

नववर्ष की बेला आयी
नव मंगल का गान है
सूर्य ने अपनी लालिमा फेरी
अम्बर ने रचा नया परिधान है

लवविवेक मौर्या उर्फ़ हेमू
पिरथीपुरवा,निघासन(खीरी)

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