लखीमपुर खीरी: लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों (एमएसएमई) के बकाया भुगतान को सुरक्षा देने के लिए एमएसएमई मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। अब सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य किया गया है कि वह हर छह माह में रिटर्न एमएसएमई को फाइल करेंगे। उन्हें बताना होगा कि उनके पास एमएसएमई सेक्टर की कितनी कंपनियों का कितना भुगतान 45 दिन से ज्यादा समय से बकाया है। यह आदेश कानपुर के लिए खास महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां 10 हजार से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं।

बड़ी कंपनियां कारोबार के दौरान छोटी कंपनियों से कोई न कोई काम कराती हैं। कई बार सप्लाई भी ली जाती है लेकिन अक्सर इन छोटी कंपनियों का भुगतान रोकने की शिकायतें आती हैं। आर्थिक संकट में फंस उनका कारोबार ठप हो जाता है। देश की आर्थिक रीढ़ कही जाने वाली छोटी कंपनियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने निर्देश जारी किए हैं। 21 जनवरी को जारी आदेश में सभी कंपनियों से 30 दिन के अंदर अपना पहला रिटर्न देने के लिए कहा गया है। इसमें कंपनियों को एमएसएमई सेक्टर की कंपनियों को न किए गए उन भुगतान की जानकारी देनी होगी जो 45 दिन या उससे ज्यादा समय से रुका है। इसके साथ ही कारण भी बताना होगा। माना जा रहा है कि पहले दौर में आंकड़े जुटाने के बाद उन पर कार्रवाई की जाएगी जो छोटी कंपनियों का भुगतान दबा लेती हैं।

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यह बहुत ही सराहनीय कदम है। कारोबार के दौरान अक्सर यह होता है कि बड़ी कंपनियां छोटी कंपनी का भुगतान रोक लेती हैं। इससे छोटी कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है।

मनोज बंका, प्रांतीय अध्यक्ष, प्राविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

छोटी कंपनियां देश में रोजगार के बड़े मौके पैदा करती हैं। इनको संकट से बचाने का प्रयास केंद्र सरकार ने किया है। रिटर्न की वजह से बड़ी कंपनियों पर भुगतान करने का दबाव भी बनेगा।

वर्षा सिंह चीफ ब्यूरो लखीमपुर खीरी

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