ज़िला उन्नाव/हज़रत मौलाना शाह फ़ज़्ले रहमा गंजमुरादाबादी रहमतुल्लाह अलैह अपनी वालिदा के साथ अकेले रहा करते थे । एक रोज़ हज़रत के किसी मुरीद को एक शख्स ने कहा कि ,”तुम्हारे पीर हज पर नहीं गए ,?” यह बात उस मुरीद ने हज़रत मौलाना शाह फ़ज़ले रहमा बाबा से अर्ज़ की तो इस बात पर हज़रत ने जवाब दिया कि ,”हाँ मैं नहीं गया ।” इतना कहने के बाद आपने भी इरादा किया कि आप भी ज़ाहिरी तौर पर हज के लिए जाये और काबे शरीफ़ की ज़ियारत कर आये । जब आपने अपनी अम्मी से इजाज़त माँगी तो उनकी वालिदा ने कहा कि ,” बेटा मैं बहुत ज़ईफ़ हो गई हंू, अगर तुम हज पर चले जाओगे तो मेरा ख्याल कौन रखेगा ? बाद में कभी चले जाना।यह सुनकर अपनी वालिदा की रज़ा के लिए आपने जाने का इरादा तर्क कर दिया और अपने हुजरे मुबारक में गये और सज्दे में सर रखकर अल्लाह से कहा,”अल्लाह ! आज तेरे फ़ज़्ले रहमा के पास कोई आकर पूँछ गया कि आप हज पर क्यों नहीं गये? मौला उसको क्या जवाब दूँ?”इसी सजदे की हालत में आप काफ़ी देर रोते रहे तो गैब से आवाज़ आई कि,”ऐ फ़ज़्ले रहमा ! सर उठाओ,जहा जाने के लिए तुम हमसे इल्तिजा कर रहे हो,देखो खुद खाना ए काबा चलकर तुम्हारे पास आया है़!” बाबा साहब किबला ने जब सर उठाया तो देखा कि काबा शरीफ़ सामने मौजूद था ! काबे शरीफ़ ने हज़रत मौलाना शाह फ़ज़्ले रहमा गंजमुरादाबादी रहमतुल्लाह अलैह सेे फ़रमाया कि,”अल्लाह और उसके रसूल से आपकी बेपनाह मोहह्बत के सबब अल्लाह ने मुझे आपके पास भेजा है ताकि आप मेरी ज़ियारत कर लें।
अल्लाह रब्बुलिज़त को गवारा ना हुआ कि मेरे महबूब का महबूब और मेरा महबूब अश्कबार हो.सुब्हान अल्लाह !

किताब हवाला:अफ़ज़ाल ए रहमानी, रहमत व नेमत

आप हज़रत मौलाना शाह फ़ज़्ले रहमा गंजमुरादाबादी रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के गंजमुरादाबाद कस्बे में है।

इरफ़ान खान बांगरमऊ उन्नाव।

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