लखनऊ। शिक्षा क्षेत्र में काम करने वाली संस्था तालीमी बेदारी द्वारा “भारत में शिक्षा: समस्याएं और संभावनाएं” विषय पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, गोमती नगर में मंगलवार एक सेमिनार का आयोजन किया। जिसकी अध्यक्षता पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश ने किया। सेमिनार में देश विदेश के सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धजीवियों ने हिस्सा लिया। पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डाॅ॰ कलाम की 89वीं जयंती पर आयोजित सेमिनार का उद्घाटन मुख्य अतिथि शाहीन ग्रुप आॅफ इंस्टिट्यूशन कर्नाटक के चेयरमैन डॉ॰ अब्दुल कदीर ने शमा रोशन कर किया। संस्था के अध्यक्ष डाॅ॰ वसीम अख्तर ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। संबोधन में डॉ॰ कदीर ने कहा डॉ कलाम ने शिक्षा के महत्व को न सिर्फ खुद समझा बल्कि उसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे। उन्होंने भारत को एक विकसित और शक्तिशाली देश बनाने का सपना देखा था। शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाकर ही देश को विकसित बनाया जा सकता है। बिहार के पूर्व सांसद साबिर अली ने कहा कि शिक्षा से सामाजिक-आर्थिक विकास संभव है। इंजीनियर अख्तर हुसैन ने कहा यह समय ज्ञान और तकनीक का है। डॉ॰ बंसत कुमार ने कहा कि कलाम साहब तकनीकी शिक्षा व आधुनिक शिक्षा पर बल देते थे। वो सीखने पर जोर देते थे उनका मानना था कि इंसान के सीखने की कोई उम्र नहीं होती। विशिष्ट अतिथि आदिल खान ने कहा संस्था तालीमी बेदारी का यह कारवां शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी क्रांति लाएगा। अध्यक्षीय संबोधन में पूर्व डीजीपी रिजवान अहमद ने कहा कलाम साहब के विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए समाज के शिक्षित, जागरूक और सक्षम लोगों को आगे आना होगा। सेमिनार में छात्रों के “ड्राॅपआउट की समस्या और समाधान” पर शिक्षाविदो ने अपने विचार रखे तथा मेधावी छात्र-छात्राओें को भी सम्मानित किया। सेमिनार में निहाल अहमद, डॉ॰ आरिज़ कादरी, सगीर ए ख़ाकसार, डॉ आईएम तव्वाब, सय्यद रफतुल्लाह,आरिफ बेग आदि मौजूद रहे।

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रिपोर्ट/साहिल स्वतंत्र
ज़िला/उन्नाव

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