कबीर आश्रम पर हुआ सत्संग
मैनपुरी ।रविवार को कबीर आश्रम पर हुए सत्संग में आश्रम के महंत अमर साहेब ने बताया कि बसंत ऋतुओं का राजा है वसंत में सारी प्रकृति नई कोपलों को फूलों से लद जाती है बसंत के बाद ग्रीष्म ऋतु आती है सारे पेड़ पौधे वनस्पति जलने लगती तभी बरसात आती जलती हुई वनस्पतियो को पुनः हरा भरा कर देती। सद्गुरु बताते हैं मानव जीवन में तो 12 बार मास वसंत रहता है नए शरीर धारण करते पुराने छोड़ते हैं जन्म मरण के प्रवाह में विकारों एवं मानसिक तापो की भीष्म दत्त में सारी मानव सृष्टि झुलस रही है मानसिक ताप से बचने के लिए सत्संग के जल की वर्षा में शीतल मानवीय सद्गुणों को हम क्या ग्रहण कर पाते सद्गुणों की सुगंध हवा के प्रतिकूल दिशा में फैलती है जबकि पुष्पो की सुगंधी हवा के रुख से बहती है मानवता के भावों से जिसका हृदय भरा नहीं तथा जिसके हृदय से प्रेम रस की धारा बहती हो भक्त सेवा का भाव रखता हो तथा जिसमें अपने आत्म परमात्म देश में प्रेम संपूर्ण ना हो तो उसके हृदय पर किसी सत्संग या बसंत का प्रभाव पड़ना मुश्किल है। साहेब बताते हैं कि शरीर भी एक सूक्ष्म देश है हृदय नहीं वह पत्थर है जिसमें अपने माता पिता अपने आत्मदेव से प्यार नहीं करता जो अपनी आत्मा की आवाज को नहीं मानता ,जो मन की गुलामी में जीवन जीता उसका स्वतंत्र जीवन नहीं हो सकता ।कथनी और करनी में जो भिन्नता रखता वह धर्म नहीं पाखंड है।
साहेब बताते हैं की हे मानव अपने जीवन में जब जल का महत्व है ऑक्सीजन का महत्व भोजन का महत्व है तो भजन का महत्व क्यों नहीं जिस प्रकार शरीर से गंदगी के साथ सारे विकार निकलते रहे तो शरीर निरोग रहेगा तथा भजन ध्यान से मानसिक विकार छटते रहते तभी मन शांत रहेगा आज भौतिक युग में सभी लोग चर्चा करते हैं हमारे पास इतना धन है इतना महल मकान है इतनी फैक्ट्री कल कारखाना है लेकिन आज तक हमारे कितने विकार दूर हुए हैं कितना भजन भक्ति परमार्थ कर सके हैं आत्म आवाज के अनुसार कितनी स्वाँस व्यतीत किए हैं यह विचार क्या हमारे अंदर आते हैं बसंत पंचमी पर सभी घरों में नए अनाज की बाली लाकर लगाई जाती हैं इसी प्रकार अपने शरीर रूपी घर में शुद्ध सत्संग की महिमा के द्वारा अपना मन और जीवन शुद्ध एवं मानवीय सद्गुणों से सुगंधित कर लेना ही सच्चा बसंत पंचमी का पर्व होगा।

रिपोर्टर गिरीश शाक्य
आज का अपराध न्यूज़
जिला ब्यूरो चीफ मैनपुरी

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