अनपढ़ों द्वारा देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाला यह साहसिक कृत्य इतिहास के पन्ने में अद्वितीय है। चौरी चौरा की ऐतिहासिक “क्रांति” जिसे “चौरी चौरा काण्ड” के नाम से जाना hiजाता है, 4 फरवरी सन 1922 को घटित हुई।चौरी चौरा की क्रांति ने ब्रितानिया हुकूमत की चूलें हिला के रख दीं और भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन को बहुत गहराई तक प्रभावित किया।इस क्रांति को अंजाम देने वाले भगवान अहीर,विक्रम अहीर,कालीचरन कहार,अब्दुल्ला,राम लगन लोहार,नजर अली,रघुबीर सोनार, लाल मुहम्मद और सम्पत अहीर सहित सभी ज्ञात-अज्ञात अमर शहीदों को नमन और श्रद्धांजलि।जब अन्याय और अत्याचार की पराकाष्ठा हो जाती है तब गरीब और मजबूर लोग उसके विरोध में उठ खड़े होते हैं चौरी चौरा की क्रांति ऐसे ही अन्याय और अत्याचार की घटनाओं के प्रतिकार का सम्मिलित प्रभाव है।
गरीबों और मजदूरों के श्रम शक्ति और संसाधनों पर अपना अधिकार जमाने वाले यहां के जमींदार क्रूर और आताताई रहे हैं।दरअसल अगर आप चौरी चौरा की क्रांति की सतही जानकारी लेने की बजाय एक परत भी नीचे जाएंगे तो कुछ चौंकाने वाले सत्य आपके सामने होंगे मसलन इस क्रांति में दोषी/सजायाफ्ता तमाम लोग निचली कामगार जातियों के थे और उनके अलावा बड़ी संख्या में मुसलमान।इतिहास उपेक्षा नहीं खंगालने की चीज है अगर आप उसकी उपेक्षा करते हैं तो वह आपकी उपेक्षा कर देगा और अगर आप उसको नष्ट करेंगे तो वह आपकी आने वाली नस्लों को नष्ट कर देगा।पूर्वाग्रह से ग्रसित विश्लेषण से परे सही और सटीक विश्लेषण ही चौरी चौरा की क्रांति के महान नायकों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

आज का अपराध न्यूज़
इरफ़ान खान यूपी हेड उन्नाव।

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