पलिया कलां खीरी। नगर के प्राथमिक विद्यालय हो या थारू क्षेत्रों के प्राथमिक एवं जूनियर स्कूलों की बात की जाए तो यह सब शिक्षा दीक्षा राम भरोसे है। बदलाव एवं आधुनिकता के इस युग में इन स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था में कोई बदलाव तो दूर दो दशक पूर्व की शैक्षणिक व्यवस्था भी नहीं दिख रही है। शिक्षामित्र एवं प्रधानाध्यापक किसी तरह विद्यालयों को खींच रहे हैं। स्कूल के बच्चे मिड डे मील खा लें और छात्रवृत्ति एवं नि:शुल्क किताबें बंट जाए अध्यापकों को बस इसी की चिंता लगी रहती है। बच्चा आलेख लिखा कि नहीं, गणित का गुणा भाग लगाया अथवा नहीं यह परिदृश्य अब विद्यालयों से नदारद हो गया है।बच्चे स्कूल में शोर करें अथवा आपस में मारपीट कर लें कभी गुरुजी की भृकुटी टेढ़ी नहीं होती। शिक्षा दीक्षा की सबसे बदहाल स्थिति नगर व पंचायत थारू क्षेत्रों की है बताया जाता है शासन द्वारा प्राथमिक बच्चों को टाई एवं बेल्ट देने का भी निर्णय लिया है। किन्तु ऐसे हालात में टाई बेल्ट लगाने से भी बच्चों की तकदीर नहीं बदलने वाली। नगर में पिछले एक दशक से सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य नहीं हो रहा है। पढ़ाई न होने पर अभिभावक अपने बच्चों को नर्सरी स्कूल में भेज दे रहे हैं किन्तु शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों ने कभी इस पर चिंता नहीं जतायी। विद्यालय में कितने नये कमरे बने हैं। रंगाई पुताई हुई या नहीं अधिकारी इस पर ही खास नजर रखते हैं। कहने के लिये तो पलिया तहसील क्षेत्र में प्राथमिक एवं जूनियर विद्यालय हैं लेकिन इसमें एक भी ऐसा विद्यालय नहीं है जिसको कहा जाये कि यह आदर्श है।

आज का अपराध न्यूज़ रिपोर्ट
शादाब खान

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