लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश में एक तरफ खुशी दूसरी तरफ किसानों के लिए मातम जैसे हालात हैं वही कुछ चेहरों पर मुस्कुराहट नजर आ रही है बारिश गेहूं की खेती के लिए वरदान साबित हो रही है। वहीं दूसरी तरफ आलू-गोभी की खेती करने वाले किसान परेशान हैं। क्योंकि बारिश से आलू भूमि में सड़ने शुरू हो गए है। गोभी की खेती एक साथ तैयार होने से बाजार मंदा है और खरीदने वाला कोई नहीं मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश में कई दिन से हो रही बे-मौसम बारिश गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित हो रही है। खेत में खड़ा गेहूं बारिश से दिन प्रतिदिन बड़ा रहा रहा है। इसे देख किसान खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। वही लगातार बारिश होने से आलू-गोभी की खेती करने वाले किसान परेशान हैं। जलभराव से खेतों में आलू सड़ने लगा है। गोभी की खेती करने वाले किसानों को भी बारिश से भारी नुकसान है।

उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में हजारों बीघा भूमि में किसानों की गोभी की फसल खड़ी है। बारिश से पहले किसानों को गोभी से अच्छा मुनाफा होने का अनुमान था लेकिन अचानक लगातार बारिश पड़ने से अगेती-पछेती फसल एक साथ तैयार हो गई। इससे बाजार में मंदा है।

पांच बीघा भूमि में गेहूं की खेती है। पहले बारिश नहीं होने से गेहूं के पौधे पनप नहीं रहे थे। अच्छी बारिश होने से गेहूं की खेती में रौनक है और अच्छी पैदावार हाने की उम्मीद है। वहीं आलू-गोभी के किसानों के लिए बारिश से नुकसान है।

कैलाश चंद, मोहल्ला शिवनगर। पांच बीघा आलू और इतनी ही गोभी की फसल बटाई पर लगाई थी। दोनों फसलों पर लगभग तीस हजार रुपये की लागत आई थी। जिसमें अच्छा फायदा होने का अनुमान था। इस बारिश से अरमानों पर पानी फिर गया। आधी लागत भी मिलनी मुश्किल है।

सतीश, मील वाली मढै़या। बारिश से आलू-गोभी की फसल हो भारी नुकसान है। हमने आठ बीघा भूमि में आलू-गोभी की खेती की थी। बारिश पड़ने से खेत में खड़ा आलू सड़ने लगा है। वहीं गोभी की फसल एक साथ तैयार होने से बाजार में मंदा हो गया है। इससे भारी नुकसान है।

शीशराम ¨सह, कल्याणपुरा। बारिश ने आलू-गोभी की खेती करने वाले किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। बारिश से खेत में खड़ा आलू सड़ने लगा है। गोभी की फसल भी एक साथ तैयार होने से बाजार में मंदा है। गोभी को खरीदने वाला भी नहीं तैयार नहीं है।

राजीव, सोनिया मेनका

फसल को रोगों से बचाएं

अमरोहा: जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजीव कुमार ¨सह ने कहा कि गन्ना की फसल को कीट व रोगों से बचाने के लिए बीज शोधन व भूमि शोधन करने के बाद ही फसल की बुआई करें।

उन्होंने कहा कि इस समय गन्ना की बुआई का समय चल रहा है। लिहाजा किसान बीज शोधन व भूमि शोधन के बाद ही बुआई करें। बीज जनित रोगों से फसल को बचाने के लिए ट्राइकोडरमा के घोल का प्रयोग करें तथा भूमि शोधन के लिए ब्यूवेरिया बेसियान का प्रयोग करना चाहिए।

सरसों व चना-मटर की फसल भी बर्बादी के कगार पर

गजरौला: बिन मानसून हो रही बारिश से ब्लाक स्थित सैकड़ों बीघा खेती को भारी नुकसान किया। खेतों में खड़ी आलू, सरसों व चना-मटर की फसल बर्बादी के कगार पर पहुंच गई। बरसात के कारण आलू व सरसों की फसल को खासा नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है।

बसंत पंचमी से शुरू हुआ बारिश का दौर नहीं थम रहा है। बारिश अब किसानों के लिए आफत बनने लगी है। चूंकि खेतों में पकी खड़ी सरसों की फसल पर तीखा प्रभाव पड़ रहा है। वहीं आलू की फसल भी प्रभावित हो रही है। आलू की खुदाई ठप पड़ी हैं। वहीं आलू की फसल बारिश के कारण गलने का डर किसानों को सता रहा है। कुमराला निवासी किसान रमेश, धर्मवीर ¨सह, राम¨सह आदि का कहना है कि बारिश से सरसों की पकी फसल बर्बाद हो रही है। वहीं आलू की फसल गलने की कगार पर है।

वर्षा सिंह जिला चीफ ब्यूरो लखीमपुर खीरी

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