नशीली दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने के लिए पूर्व एसओ ने दवा व्यापारियों संग मीटिंग करके उसकी बिक्री न करने के निर्देश भी दिए

पलिया कलां-खीरी।शहर सहित आसपास के पूरे ग्रामीण क्षेत्र में धडल्ले से नशीली दवाओं का कारोबार हो रहा है। शहर सहित कस्बों और गांवों के मेडिकल स्टोर्स पर स्पासमोप्रोक्सवाॅन, बूटा प्रोक्सवाॅन, एल्प्रेक्स, डायगापास और नाइट्रोवैट टेन जैसे इंजेक्शन धडल्ले से बिक रहे हैं। चार से पांच रूपए में मिलने वाले इन इंजेक्शनों को दर से करीब दस गुना रेट पर ब्लैक में बेचा जाता है। अमूमन दर्द और लेवर पेन के लिए इस्तेमाल आने वाले इन इंजेक्शनों को नशे के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। सीरिंज द्वारा इसके प्रयोग से शरीर में किसी भी तरह के थकान का आभास नहीं होता है और दिमाग काम करना बंद कर देता है।
पलिया तहसील क्षेत्र और इसके आसपास के गांवों में भी इन दिनों मौत का कारोबार चरम पर है। ये कारोबार है नशीली दवाइयों, इंजेक्शन और गोलियों का जो युवकों को तेजी से अपने आगोश में ले रहा है। इसमें अमीर से लेकर गरीब वर्ग तक के नौजवान शामिल है। शहर के एक बडे दवा व्यवसायी का कहना है कि स्पाॅस्मो प्राॅक्सीवाॅन की एक दिन की खपत हजारों में है। इसी की श्रेणी का एक और कैप्सूल है जिसे बूथ प्रोक्सीवाॅन कहते हैं। यह कैप्सूल प्रसव के दौरान होने वाली पीडा से मुक्ति दिलाता है। लेकिन इसका प्रयोग नशेडियों के बीच धडल्ले से किया जा रहा है। दिमाग की नसों को सुन्न करने वाले इन कैप्सूल और इंजेक्शनों ने जात पात अमीर गरीब का भेदभाव मिटा रखा है। डाक्टरों के अनुसार इन दवाइयों में हाइड्रोक्लोराइड और नैसीलेट नामक साल्ट होते हैं जो इंसान के दिमाग को बाकी दुनिया से कुछ देर के लिए अलग कर देते हैं। इसी तरह एलप्रेक्स, डाइजापाम, एल्प्राक्विल, विलियम और ट्राईका जैसी गोलियों का सेवन करने में भी युवा वर्ग पीछे नहीं हैं। इनमें से अधिकतर गोलियों में एलप्राप्सोलम साल्ट होता है ये गोलियां हृदय संबंधित रोगों में, अवसाद में, तनाव में या नींद न आने पर डाक्टरों द्वारा दी जाती हैं। जहरखुरानी गिरोह के लोग इन गोलियों का प्रयोग अपने शिकार को सुलाने के लिए करते हैं। हैरानी की बात है कि जिन दवाइयों को बिना डाक्टर की सलाह के नहीं बेचा जा सकता है उन्हें शहर समेत ग्रामीण क्षेत्र के मेडिकल स्टोर 10 से 15 रूपए में धडल्ले से बेंच रहे हैं। एसओ रामकुमार यादव ने बीते दिनों दवा व्यापारियों के संग मीटिंग करके निर्देश दिया था कि वह बिना डाक्टर के पर्चे के किसी भी दवा की बिक्री न करें। इसके बाद भी नशीली दवाओं की बिक्री का कारोबार थमने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। नशीली दवाओं का यह अवैध कारोबार भारत नेपाल सीमा पर भी फैला हुआ है। धंधेबाज लोग यहां से चोरी छिपे नशीली दवाइयां ले जाते हैं और सांठगांठ करके उनको नेपाल में सप्लाई भी करते हैं। इसका भी प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां आए दिन हजारों रूपए की नशीली दवाएं बरामद कर रहीं हैं।

रिपोर्ट :नुरुददीन गौरी इंडिया हेड आज का अपराध न्यूज लखीमपुर खीरी

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