जनपद में चौरी चौरा शताब्दी समारोह का हुआ भव्य आयोजन

शहीदों के दिखाए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धाजंलि

स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन की गवाह शहीद स्थल पर शहीदों को दी श्रद्धाजंलि

शहीद श्री बाबू सिंह चैहान की स्मृति में विकास कार्यों के लिए 25 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत

जनपद भर में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने शहीदों के प्रति कृतज्ञता की प्रकट, चढ़ाए श्रद्धा के फूल

 मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक…… मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक….. माखनलाल चतुर्वेदी की यह पंक्तियां चैरी-चैरा शताब्दी वर्ष महोत्सव पर गूंज उठीं और वीर सपूतों के शौर्य और पराक्रम से ओतप्रोत वीर गाथाओं को याद करते हुए प्रदेश भर के साथ ही अलीगढ़ के 12 शहीद एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ग्रामों में ’चैरी-चैरा शताब्दी समारोह’ का आयोजन पूर्ण दिव्यता एवं भव्यता के साथ किया गया। मुख्य कार्यक्रम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद श्री बाबू सिंह चैहान के ग्राम साथ में आयोजित किया गया, जहां मण्डलायुक्त गौरव दयाल समेत जिलाधिकारी चन्द्र भूषण सिंह एवं सीडीओ अनुनय झा ने शहीद स्वतंत्रता सेनानी स्व. श्री बाबू सिंह चैहान की धर्मपत्नी श्रीमती अशर्फी देवी का शाॅल ओड़ाकर एवं पुष्प गुच्छ देकर सम्मान किया। अधिकारियों द्वारा शहीद श्री चैहान के चित्र पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया गया। मण्डलायुक्त ने शहीद श्री बाबू सिंह चैहान की स्मृति में ग्राम साथा के माजरा मीरपुर में विकास कार्यों के लिए 25 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत किए जाने की घोषणा करते हुए कहा कि ’’शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले…. वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा। उन्होंने कहा कि आज युवा पीढ़ी आजादी के सूरमाओं को भूलती जा रही है शहीदों द्वारा दिखाए मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धाजंलि होगी।

          मण्डलायुक्त गौरव दयाल ने कहा कि चैरी चैरा शताब्दी महोत्सव से हमारी नई पीढ़ी को शहीदों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के पराक्रम एवं शौर्य गाथाएं देखने और सुनने को मिलेंगीं। नई पीढ़ी के लिए शताब्दी समारोह अवश्य ही एक नया मार्गदर्शन और प्रेरणा लेकर आएगा। ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला देने वाली स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन की इस घटना के गुमनाम बलिदानियों को सम्मान देने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चैरी चैरा शताब्दी समारोह का आयोजन शहीदों प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि आज बड़े ही हर्ष का दिन है कि जिनकी वजह से देश को आजादी मिली और सीमाएं सुरक्षित हैं उनको हम याद ही नहीं बल्कि उनका सम्मान भी कर रहे हैं।

          जिलाधिकारी चन्द्र भूषण सिंह ने कहा कि चैरी-चैरा की घटना आज सौ वें वर्ष में प्रवेश कर रही है, शहीदों को सम्मान देने का एक अच्छा अवसर है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर पूरे वर्ष भर इस ऐतिहासिक घटना को याद कर मनाया जाएगा। हम सभी इस आयोजन के माध्यमसे स्वदेशी, स्वावलम्बन और स्वच्छता की ओर अग्रसर हो सकेंगे।

 

क्या थी चैरी-चैरा की घटना

 

          साल 1922 में महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन अपने पूरे शबाब पर था। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के चैरी चैरा में अंग्रेजी सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन चल रहा था। 4 फरवरी 1922 को आन्दोलनकारी शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए चैरी चैरा के थाने पहुंचे तो तीन क्रातिकारी पुलिस की गोलीबारी से शहीद हो गये, तो वहीं भीड़ के गुस्से की प्रतिक्रिया स्वरूप चैरी चैरा थाने में आग लगा दी गयी जिसमें कई पुलिसकर्मी

रिपोर्ट उपवेन्द्रकुमार राजपूत अलीगढ़

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