उन्नाव

उन्नाव जिले में लगातार देखने को आ रहा है आए दिन किसी ना किसी क्षेत्र में किसी ना किसी किसानों की खेती में हाईटेंशन 11000 लाइन टूटने से सैकड़ों बीघे गेहूं की फसल जलकर खाक हो रही है किसान बेचारा दिन रात मेहनत मस्क्कत करके रात भर जागकर गायों से बचाई रवि की फसल और साल भर खाने के लिए आनाज जमा करता है। दुर्भाग्य बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही के कारण किसानों की फसल पल भर में जल कर खाक हो रही हैं। अब किसानों के पास बची सिर्फ फसल की खाक ही खाक।

उठता है एक बड़ा सवाल देखना यह है हमारी सरकार किसानों के लिए क्या करती है

इसलिए किसानों को मुआवजा पाने का पूरा हक व अधिकार है।

उन्नाव उत्तर प्रदेश में हाई वोल्टेज विद्युत लाइनों का जाल तेजी से बढ़ रहा है । इन सभी लाइनों के नीचे बड़ी मात्रा में आने वाली कृषि जमीन प्रभावित हो रही हैं और उनका मूल्य गिर रहा है । जिस जमीन के ऊपर से ये हाई वोल्टेज/ एक्सट्रा हाई वोल्टेज विद्युत लाइनें गुजरती है वह जमीन एक तरह से ट्रांसमिशन कम्पनियों के आधीन हो जाती है हालांकि कानूनी तौर पर मालिकाना हक भूस्वामी का बना रहता है । इससे किसानों को आर्थिक क्षति होती है । इस क्षति की भरपाई के लिए अनेक किसान संघर्षों के बाद भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने एक कमेटी गठित की जिसने वष॔ 2015 में विद्युत लाइनों के रास्ते का अधिकार ( Right of way, ROW ) के संबंध में क्षति पूर्ति देने के लिए एक दिशा निर्देश जारी किया था । इस दिशानिर्देश के मुताबिक विद्युत कंपनियों द्वारा उन भू-स्वामियों को जमीन की कीमत का 85 प्रतिशत क्षतिपूर्ति देना होगा जिनकी जमीन पर टावर खड़े किए जायेंगे और जिन किसानों की जमीन के ऊपर से विद्युत लाइनें गुजरेगी उन्हे रास्ते के अधिकार के तहत जमीन की कीमत का 15 प्रतिशत क्षतिपूर्ति देना होगा ।
ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार के इन आदेशों का विद्युत कंपनियाँ द्वारा पालन नहीं किया जाता है । खास कर उत्तर प्रदेश के किसानों को क्षति पूर्ति का ज्ञान न होने के कारण विद्युत कंपनियाँ किसानों को क्षति पूर्ति नहीं करती है जबकि पश्चिम बंगाल के भांगर तमिलनाडु,असम आदि स्थानो पर पावर ग्रिड कारपोरेशन की हाई वोल्टेज परियोजनाओ के खिलाफ इसके उदाहरण हैं । इसमें भांगर की जनता संघर्ष कर भारत सरकार के क्षति पूर्ति के दिशा निर्देश से भी आगे बढ़कर विद्युत कंपनियों से क्षति पूर्ति देने के लिए बाध्य किया है । जबकि उत्तर प्रदेश के किसानों ने विद्युत कंपनियों से क्षति पूर्ति लेने के लिए आंदोलन करने में पिछड़े रहते हैं।

रिपोर्ट .मोहम्मद इरफान खाँ जिला संवाददाता आज का अपराध बांगरमऊ उन्नाव

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